जनजीवन ब्यूरो / नई दिल्ली : 29 जून, 2025 की सुबह 69 वर्ष की एक रिटायर्ड टीचर योगा सत्र के लिए तैयार होते वक्त बाथरूम में बेहोश होकर गिर पड़ी थीं। परिवार उन्हें तुरंत मणिपाल हॉस्पिटल लेकर आया, जहाँ सीटी स्कैन कराने पर मस्तिष्क के अंदर बहुत बड़ा रक्तस्राव दिखाई दिया। उन्हें होश में लाया गया और वेंटिलेटर पर रख दिया गया। इंटेंसिव केयर यूनिट में विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सर्वश्रेष्ठ इलाज के बाद भी उनकी स्थिति को संभाला नहीं जा सका। और 2 जुलाई, 2025 की देर शाम को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
इस भीषण दुख के क्षण में भी उनके पुत्र और परिवार ने उनके अंगों को दान करने का साहसिक निर्णय लिया। उनके पुत्र की सहमति के बाद उनके लिवर, दोनों किडनी और कॉर्निया को दान कर दिया गया, जिससे कई मरीजों को नया जीवन मिल सका। उनका लिवर एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका में एक 33 वर्ष की महिला को लगा दिया गया। एक किडनी उसी हॉस्पिटल में 51 वर्ष के पुरुष के शरीर में ट्रांसप्लांट की गई, वहीं दूसरी किडनी दिल्ली में एक अन्य हॉस्पिटल को भेज दी गई, जहाँ यह किडनी 34 वर्ष के पुरुष मरीज को दे दी गई। उनके दोनों कॉर्निया निर्मया आई बैंक को भेज दिए गए, ताकि लोगों को नई दृष्टि प्रदान कर उनके जीवन में सुधार लाया जा सके।
डॉ. अनुराग सक्सेना, क्लस्टर हेड, दिल्ली एनसीआर, न्यूरोसर्जरी विभाग, एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका ने कहा, ‘‘इस मुश्किल समय में भी परिवार का साहस और शक्ति सराहनीय है। इस मरीज की ब्रेन एन्यूरिज़्म फट जाने के कारण मस्तिष्क में भारी मात्रा में रक्तस्राव हुआ था। इसके परिणाम क्या होंगे, यह समझते हुए परिवार ने मरीज का नॉन-सर्जिकल इलाज जारी रखने का निर्णय लिया। हमारी पूरी कोशिशों के बाद भी मरीज को अपना जीवन वापस नहीं मिल सका और 2 जुलाई, 2025 को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। अपने अंतिम क्षणों में उन्होंने हमें दयाभाव और उदारता की सीख दी।’’
डॉ. श्रीकांत श्रीनिवासन, चेयरमैन, मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसीन, एचसीएमसीटी मणिपाल हॉस्पिटल, द्वारका ने कहा, ‘‘अंगदान जीवन के अंत में की जाने वाली देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे लोगों को उम्मीद मिलती है तथा अनेकों लोगों की जान बचती है। हर अंगदान हमें यह याद दिलाता है कि अपने जीवन के अंतिम क्षणों में हम किसी को भविष्य का उपहार दे सकते हैं। इस गहरी व्यक्तिगत पीड़ा के समय इस परिवार ने अभूतपूर्व साहस का परिचय देते हुए मरीज के अंगों को दान करने का निर्णय लिया, जिससे पाँच अन्य लोगों को जीवन का उपहार मिला।’’
भारत में ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है, जबकि अंगों की उपलब्धता बहुत कम। राष्ट्रीय आँकड़ों के मुताबिक, हर साल लगभग 1.8 लाख लोगों की किडनी फेल होती है। इसके बावजूद, 2023 में केवल 13,426 किडनी प्रत्यारोपण किए जा सके। इसी तरह हर साल लगभग 25,000 से 30,000 लिवर ट्रांसप्लांट कराने की जरूरत पड़ती है। लेकिन पिछले साल केवल 4,491 लिवर ही ट्रांसप्लांट ही किए जा सके। वहीं हर साल लगभग 25,000 कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, जबकि जरूरत 1 लाख ट्रांसप्लांट करने की है।
अंगदान की जरूरत से भारत में ट्रांसप्लांट के बढ़ते अंतर और इस महान कार्य का महत्व प्रदर्शित होता है। हर साल हजारों लोग ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हैं, इसलिए जन जागरुकता और प्रतिभागिता बहुत महत्वपूर्ण है। हर डोनर में किसी का जीवन बदलने की शक्ति है। अंगदान एक ज्यादा आशान्वित और स्वस्थ भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है।













