जनजीवन ब्यूरो / मुंबई: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व प्रवक्ता आरती अरुण साठे की बॉम्बे हाई कोर्ट में जज के रूप में नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद छिड़ा हुआ है. इसके लेकर विपक्ष ने बीजेपी पर निशाना साधा है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 जुलाई को आरती साठे को बॉम्बे हाई कोर्ट का जज नियुक्त करने की घोषणा की थी.
विपक्ष ने आरती साठे की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा है, “क्या राजनीतिक मामले ऐसे जजों के पास जाने से न्याय मिलेगा?’ इस संबंध में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की आलोचना की है.
संजय राउत ने साधा निशाना
शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भी इस मामले में बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि न्यायपालिका में गिरावट आ रही है. ऐसे व्यक्ति को बॉम्बे हाईकोर्ट का जज नियुक्त करना अदालत की महान परंपरा को कलंकित करता है. मुझे इनमें से किसी से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन, भाजपा के सत्ता में आने के बाद से तमिलनाडु राज्य की चेन्नई अदालत में भी ऐसी ही घटना घटी है, जहां एक भाजपा प्रवक्ता को जज बना दिया गया था और अब यही घटना मुंबई में भी हुई है.” संजय राउत ने आगे कहा कि किसी भी पार्टी का प्रवक्ता उस पार्टी की विचारधारा से बंधा होता है.
सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि एक बार कोई व्यक्ति किसी पार्टी का प्रवक्ता बन जाता है, तो वह जीवन भर प्रवक्ता ही रहता है. मेरी जानकारी के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट में पांच ऐसे जज हैं जो भाजपा और संघ परिवार से जुड़े हैं. एक समय में ये पांचों जज स्वयं संघ शाखा से जुड़े थे. इनके परिवार संघ से जुड़े हैं. ऐसे लोगों को न्यायपालिका में नियुक्त करना और पूरे देश की न्यायपालिका को अपने हाथ में रखना भाजपा, नरेंद्र मोदी और अमित शाह की साजिश है,”
उन्होंने कहा कि आरती साठे के पिता अरुण साठे भी एक प्रसिद्ध वकील हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े हैं. वे पूर्व में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी रह चुके हैं. इस मामले में पार्टी का पक्ष रखते हुए भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि आरती साठे ने कुछ साल पहले भाजपा प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है.
इस मामले पर मीडिया से बात करते हुए विधायक रोहित पवार ने कहा कि जज के रूप में नियुक्त वकीलों के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया दो साल पहले शुरू होती है. आरती साठे की नियुक्ति की घोषणा अब 2025 में की गई है. बीजेपी के सदस्य कह रहे हैं कि उन्होंने 2024 में ही प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन जब कॉलेजियम जज पद के लिए इंटरव्यू ले रहा था, तब वह 2023 से 2024 तक प्रवक्ता थीं.
उन्होंने कहा कि क्या कॉलेजियम को यह नहीं पता? क्या उसे यह भी नहीं पता कि आरती साठे आधिकारिक तौर पर एक पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही थीं? अगर हमारा मामला ऐसे जज के पास जाएगा तो क्या हमें न्याय मिलेगा? विधायक रोहित पवार ने मांग की है कि कॉलेजियम आरती साठे की नियुक्ति वापस ले.













