जनजीवन ब्यूरो/ नई दिल्ली। उप राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए अधिसूचना आज जारी कर दी गई है। चुनाव 9 सितंबर को प्रस्तावित है। अधिसूचना जारी होते ही उम्मीदवारों को लेकर ना सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं राजनीतिक दल अपनी अपनी रणनीति बनाने में जुट गई है। सत्तापक्ष की ओर से यानी एनडीए की ओर से कौन उम्मीदवार होगा, इसे लेकर ज्यादा अटकल नहीं है क्योंकि ज्यादातर लोग मान रहे हैं कि फैसला दो लोगों को करना है। इसके बावजूद सरकार किसी तरह का जोखिम लेना मुनासिब नहीं समझ रहा है। सरकार का मानना है कि अगर उप राष्ट्रपति पद के नाम पर सदन में सर्वानुमति बने, तो लोकतंत्र की खूबसूरती और दिखेगा। इस बाबत सरकार के अहम रणनीतिकार सर्वानुमति बनाने में जुट गए है। चर्चा है कि वे विपक्षी दलों के नेताओ का नब्ज टटोलने की कवायद षुरू कर दी है।
वहीं बताया जा रहा है कि विपक्ष के नेताओ ने उन रणनीतिकारों को एहसास करा दिया है कि सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों पर एकमत बनाने के बदले में उन्हें लोकसभा में डिप्टी स्पीकर देना पड़ेगा। मगर इतना तो तय है कि क्या फैसला होगा इस पर सस्पेंस अंत समय तक बना रहेगा
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सत्ता पक्ष और विपक्ष उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने- अपने प्रत्याषियों के नाम को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। चर्चा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व जिसे चाहेंगे वह उम्मीदवार बनेगा। वह भाजपा का नेता होगा या किसी सहयोगी पार्टी का नेता होगा और किसी चुनावी राज्य का व्यक्ति होगा या कहीं अन्य का, यह फैसला उन दो लोगों को करना है। भले एनडीए में ज्यादा कसरत की जरुरत नहीं पड़ेगी, लेकिन विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में बहुत ज्यादा कवायद की जरुरत होगी। विपक्षी गठबंधन की पार्टी में सहमति बनाने के लिए बड़े प्रयास करने होंगे। इस सिलसिले में शुरुआती बातचीत हुई है। यह लगभग तय है कि विपक्षी गठबंधन चुनाव लड़ेगा। इसका अर्थ है कि उप राष्ट्रपति का चुनाव निर्विरोध नहीं होने जा रहा है। कांग्रेस चाह रही है कि उसके किसी नेता को चुनाव लड़ाया जाए। इससे पहले के दो चुनावों में कांग्रेस ने अपनी शक्ति नहीं दिखाई थी या विपक्षी पार्टियों के सामने अपने उम्मीदवार के लिए दबाव नहीं बनाया क्योंकि तब कांग्रेस बहुत कमजोर थी। पहले उसके पास लोकसभा में सिर्फ 44 और दूसरी बार 52 सांसद थे। लेकिन इस बार लोकसभा में कांग्रेस मजबूत हुई है और उसके एक सौ सांसद हैं। इसलिए वह विपक्षी गठबंधन की धुरी है। तभी कहा जा रहा है कि कांग्रेस का कोई नेता प्रत्याशी हो सकता है। हालांकि ममता बनर्जी की ओर से इस बात का दवाब रहेगा कि पूर्वी भारत से, खास कर पश्चिम बंगाल से ही किसी को उम्मीदवार बनाया जाए। कोई बांग्लाभाषी प्रत्याशी होगा तो उसका असर पश्चिम बंगाल और असम दोनों जगह होगा। एक दूसरा तर्क यह है कि कांग्रेस चूंकि दक्षिण भारत के दो राज्यों में ही सरकार में है और अगले साल तमिलनाडु और केरल का चुनाव होना है तो दक्षिण भारत के किसी नेता को प्रत्याशी बनाने की संभावना है। अगर दक्षिण भारत का प्रत्याशी होगा तो भाजपा के सहयोगी चंद्रबाबू नायडू के लिए भी उसका विरोध करना मुश्किल हो जाएगा। बहरहाल कहा जा रहा है कि उप राष्ट्रपति के उम्मीदवार का फैसला अभी तुरंत नहीं होगा। विपक्षी पार्टियां इंतजार करेंगी और एनडीए की ओर से उम्मीदवार तय होने के बाद अपना प्रत्याशी तय करेंगी। नामांकन भले सात अगस्त को शुरू हो जाएगा लेकिन दोनों के प्रत्याशियों की घोषणा 15 अगस्त के बाद ही होगी।
बॉक्स-1
एनडीए का इनमे से हो सकते है संभावित प्रत्याशी??
रामनाथ ठाकुर, थावरचंद गहलोत, ओम माथुर, घनश्याम तिवारी, मनोज सिंहा और शेषाद्रि रामानुजन चारी का नाम को लेकर चर्चा है।













