जनजीवन ब्यूरो / नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच ने बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को कोई भी भ्रामक या नकारात्मक विज्ञापन का प्रसारण नहीं करने के सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल करने पर फटकार लगाई है. जस्टिस हरिशंकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने पतंजलि आयुर्वेद से कहा कि या तो आप याचिका वापस लीजिए या जुर्माने के लिए तैयार रहिए. मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी.
डिवीजन बेंच ने कहा कि सिंगल बेंच के आदेश में पतंजलि को पूरे विज्ञापन को हटाने के लिए नहीं कहा बल्कि उसके कुछ हिस्सों में सुधार करने को कहा था. जब कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को फटकार लगाई तो उसके वकील जयंत मेहता ने कहा कि इस संबंध में निर्देश लेना पड़ेगा. उसके बाद कोर्ट ने 23 सितंबर को सुनवाई करने का आदेश दिया.
बता दें कि 3 जुलाई को हाईकोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद को निर्देश दिया था कि वो नामी च्यवनप्राश कंपनी के खिलाफ कोई भी भ्रामक या नकारात्मक विज्ञापन का प्रसारण नहीं करें. जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने ये आदेश जारी किया था. सिंगल बेंच के इसी आदेश को पतंजलि आयुर्वेद ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी है. सिंगल बेंच में याचिका नामी च्यवनप्राश कंपनी ने दायर किया था.
सिंगल बेंच के समक्ष सुनवाई के दौरान नामी च्यवनप्राश कंपनी की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया था कि वह बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद अपने विज्ञापनों के जरिये उनकी कंपनी के च्यवनप्राश को गलत तरीके से बदनाम कर रही है.
पतंजलि पर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का आरोप : पतंजलि आयुर्वेद अपने विज्ञापनों के जरिये उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रही है. उन्होंने कहा था कि पतंजलि ने भ्रामक और गलत दावा कर यह बताने की कोशिश की है कि वही एकमात्र असली आयुर्वेदिक च्यवनप्राश बनाता है. उन्होंने कहा कि था कोर्ट ने दिसंबर 2024 में समन जारी किया था उसके बावजूद पतंजलि ने एक हफ्ते में 6182 भ्रामक विज्ञापन प्रसारित किए थे.
पतंजलि का अपने च्यवनप्राश को लेकर किया गया दावा गलत
नामी च्यवनप्राश कंपनी की याचिका में कहा गया था कि पतंजलि आयुर्वेद नामी च्यवनप्राश कंपनी के उत्पाद को साधारण बताकर उसकी छवि खराब करने की कोशिश कर रही है. याचिका में कहा गया था कि पतंजलि के विज्ञापनों में दावा किया गया है कि उसका च्यवनप्राश 51 से अधिक जड़ी-बूटियों से बना है जबकि हकीकत में इसमें सिर्फ 47 जड़ी-बूटियां हैं.नामी च्यवनप्राश कंपनी ने याचिका में आरोप लगाया था कि पतंजलि के उत्पाद में पारा पाया गया जो बच्चों के लिए हानिकारक है.













