जनजीवन ब्यूरो / पटना । Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मतदान के बाद अब पूरा ध्यान 14 नवंबर को होने वाली मतगणना पर है. सत्ता मिलेगी या जाएगी इसका द्वंद्व नेताओं के मन-मस्तिष्क में चल रहा है. 243 सीटों की विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 सीटें जीतने होंगी. एनडीए और महागठबंधन दोनों ने अपनी पूरी ताकत चुनाव में झोंकी हैइसी बीच आरजेडी नेता और महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने अपने उम्मीदवारों को फोन कर काउंटिंग के दिन की रणनीति तय की और सख्त निर्देश दिए कि “घबराना नहीं, आख़िरी वोट तक डटे रहना है.”
कौन बनेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री? क्या बिहार में बहार रहेगी और नीतीशे कुमार की सरकार दोबारा आएगी या फिर इस बार तेजस्वी का तेज दिखेगा और महागठबंधन की सरकार बनेगी? इस तरह के कई सवाल हैं, जो आम आदमी के मन में चल रहे हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तेजस्वी यादव आरजेडी उम्मीदवारों और जिला पदाधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं. उन्होंने सुबह से लेकर देर रात तक लगातार फोन पर बातचीत की और लगभग 143 विधानसभा सीटों के प्रत्याशियों से सीधे संपर्क किया. तेजस्वी ने सभी को मतगणना के दिन “पूर्ण सतर्कता और अनुशासन” के साथ काम करने के निर्देश दिए.
तेजस्वी ने कहा कि “काउंटिंग वाले दिन किसी भी परिस्थिति में लापरवाही नहीं होनी चाहिए. हमारे पोलिंग एजेंट हर टेबल पर मौजूद रहें और फॉर्म 17C से लेकर ईवीएम की सील तक हर चीज की बारीकी से जांच करें.” उन्होंने यह भी कहा कि मतगणना की गति को प्रभावित करने या किसी तरह का दबाव बनाने की कोशिशें हो सकती हैं, इसलिए सबको Patience रखना है और अलर्ट रहना है.
आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, देर शाम तेजस्वी यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वरिष्ठ नेताओं और उम्मीदवारों की एक रणनीतिक बैठक भी की. इसमें तय किया गया कि जो नेता चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, उन्हें मतगणना वाले जिलों में भेजा जाएगा, ताकि वहां स्थिति की निगरानी की जा सके.
तेजस्वी ने कहा, “सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया जा सकता है, हमें एक-एक वोट की रक्षा करनी है. रिजल्ट आने से पहले किसी को भी काउंटिंग सेंटर नहीं छोड़ना है.”
एनडीए ने चुनाव प्रचार के दौरान जनता को बार-बार यह याद दिलाया है कि अगर नीतीश कुमार की सरकार नहीं रही, तो बिहार में 1990 के दशक के जंगलराज की वापसी होगी. जिन लोगों ने उस दौर को देखा है, वे अपहरण और हत्या के दौर को याद कर सिहर जाते हैं. बिहार में इस बार रिकाॅर्ड वोटिंग हुई हैं, इस वजह से भी यह माना जा रहा है कि जदयू और बीजेपी गठबंधन अपने वोटर्स को मतदान केंद्र तक ले आई है. ऐसे में परिणाम एनडीए के पक्ष में जा सकता है.
एग्जिट पोल के नीतीज एनडीए के पक्ष में जरूर दिख रहे हैं, लेकिन महागठबंधन इन नतीजों को खारिज कर रहा है. संभव है कि एग्जिट पोल के नतीजे बहुत सटीक नहीं होते हैं, लेकिन बिहार में एनडीए का पलड़ा इस चुनाव में भारी दिख रहा है, तो इसके पीछे कई ठोस वजह है. बिहार में जाति आधारित राजनीति होती है और इसी समीकरण को साधने के लिए राजद अपने कैडर वोटर यादव और मुसलमानों पर भरोसा करता है. टिकट बंटवारे में यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. बिहार में यादव वोटर्स की आबादी लगभग 15% है जबकि मुसलमान लगभग 18% हैं. इनका अगर 100 प्रतिशत वोट भी राजद को मिल जाता है तो वो 33% ही होगा. वहीं एनडीए के साथ अति पिछड़ा, दलित, ओबीसी में कुर्मी, सवर्ण जैसी जातियां हैं. इस लिहाज से अगर जातीय समीकरण पर गौर करें तो निश्चत तौर पर NDA का पलड़ा भारी दिखता है.
बिहार चुनाव 2025 में महिला वोटर्स की भूमिका बहुत अहम है. इसकी बड़ी वजह यह है कि देश के हर चुनाव की तरह बिहार चुनाव में भी महिला वोटर्स को साधने की कोशिश में एनडीए और महागठबंधन दोनों जुटा है. उनके खाते में नीतीश कुमार सरकार ने 10 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए हैं. यह राशि महिला को सशक्त बनाने और उन्हें रोजगार शुरू करने के लिए दी गई है. यह राशि पहली किस्त है, उन्हें दो लाख रुपए तक दिए जाएंगे. शराबबंदी के नाम पर नीतीश कुमार पहले ही महिलाओं का दिल जीत चुके हैं. सोशल सिक्योरिटी पेंशन की राशि को सरकार ने 400 से बढ़ाकर 1100 रुपए कर दिया है, इस वजह से भी महिलाओं का वोट नीतीश कुमार को मिलने की संभावना है.
हालांकि तेजस्वी यादव ने भी महिलाओं को माई-बहन मान योजना के तहत मासिक 2, 500 रुपए देने की घोषणा की है और यह कहा है कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो 14 जनवरी को महिलाओं के खाते में 30 हजार रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे. महिलाओं को अपनी ओर करने के लिए यह महागठबंधन की अच्छी कोशिश है, लेकिन एक्सपर्ट झारखंड का उदाहरण देकर बताते हैं कि यहां हेमंत सरकार ने मंईयां सम्मान योजना की राशि महिलाओं के खाते में चुनाव से पहले ही भिजवा दी जबकि बीजेपी ने वादा किया. फायदा किसे मिला यह सबको पता है, क्योंकि किसी चीज का वादा करना और उसे दे देना दोनों में फर्क होता है.
बिहार चुनाव में इस बार युवाओं में नीतीश सरकार को लेकर काफी रोष है. उनका गुस्सा इस बात को लेकर है कि सरकार ने उनके रोजगार के लिए कुछ नहीं किया. सरकारी नौकरी की वेकेंसी नहीं निकाली. अगर युवाओं का गुस्सा वोट में बदला तो सरकार के लिए परेशानी हो सकती है. वहीं तेजस्वी यादव ने भरपूर कोशिश की है कि वे युवाओं को महागठबंधन से जोड़कर रखें. उन्होंने यह वादा भी किया है कि महागठबंधन की सरकार बनते ही वो हर परिवार में एक सरकारी नौकरी देंगे. अब यह देखना बहुत रोचक होगा कि युवा किसके पाले में जाते हैं.













