अमलेंदु भूषण खां
नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च स्वास्थ्य संस्थान एम्स अब राजनीति का अड्डा बन गया है। एम्स के कई डॉक्टरों के अधीन काम कर चुके एम्स निदेशक अपने वरिष्ठ प्रोफेसर पर बेवजह डंडा चला रहे हैं। साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय इस राजनीति में अपना हाथ सेंक रहा है। राजनीति का खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हृदय रोग विभाग के आंकड़े इस बात को साबित कर रहा है कि पिछले कई माह से एम्स में सर्जरी करने की संख्या में कमी आ रही है।
दरअसल ताजा राजनीति की शुरुआत इमनैनला नामक नर्स ने कार्डिएक सेंटर के प्रमुख से शिकायत की कि कार्डिएक सर्जन प्रो.ए.के.बिशोई ने उनके साथ गलत व्यवहार किया। बताया जाता है कि प्रो.बिशोई ने नर्स इमनैनला को कुछ काम सौंपे थे जिसकी जानकारी एम्स के 6 कर्मचारियों के साथ बैठक में ले रहे थे। नर्स इमनैनला ने उस काम को पूरा नहीं की थी। शिकायत मिलने के बाद एम्स प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमिटि बनाई । इस बीच एम्स प्रशासन ने प्रो. बिशोई को सीटीवीएस विभागाध्यक्ष के पद से हटा दिया। विभागाध्यक्ष के पद से हटाने की कार्रवाई का एम्स फैकल्टी एसोसिएशन कड़ा विरोध किया ।
फैकल्टी एसोसिएशन के सामने आने के बाद नर्स संगठन ने इस मामले को तूल दिया और मामले की शिकायत पीएम नरेंद्र मोदी से कर दी। साथ ही एससी-एसटी कमीशन तक मामले को पहुंचा दिया गया।
एम्स की इंटरनल कमेटी ने 3 दिसंबर 2025 को सौंपे अपनी रिपोर्ट में नर्स के आरोप को बेबुनियाद बताया। लेकिन एम्स निदेशक ने उस रिपोर्ट को सामने नहीं आने दिया। प्रो.बिशोई के बार बार आग्रह पर एम्स निदेशक ने यह कहा कि प्रो. बिशोई को विभागाध्यक्ष के तौर पर दस्तखत करने से रोका है , पद से नहीं हटाया है।
बताया जाता है कि इस मामले को तूल देने में स्वास्थ्य मंत्रालय के कुछ अधिकारी संलग्न हैं जो स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा के इशारे पर काम कर रहे हैं। इस राजनीति के कारण आम मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि कार्डिएक सर्जरी विभाग में प्रत्येक माह होने वाली सर्जरी में भारी कमी आ गई है। प्रो.बिशोई नर्स और सहयोगी कर्मचारियों के अभाव में सर्जरी नहीं कर पा रहे हैं। अन्य सर्जनों को भी इसी तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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