जनजीवन ब्यूरो / नई दिल्ली । भारत की सांस्कृतिक धरोहर पूरी दुनियां को संदेश देने में कामयाब रहा है। शिक्षा और संस्कृति समाज और व्यक्ति में बदलाव लाने में कामयाब रहा है। यह बात पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारतीय विद्या भवन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैकल्टी रिसर्च के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैकल्टी रिसर्च भारतीय विद्या भवन के सहयोग से एक नया पाठ्यक्रम शुरु करने जा रहा है जो प्रायोगिक तौर पर लोगों को प्रशिक्षत करेगा। भारतीय विद्या भवन के वायस प्रेसिडेंट बनवारी लाल पुरोहित ने कहा प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व गुरु बनने का सपना सच तभी हो सकता है जब देश के बौद्धिक लोगों की भागीदारी होगी।
कोविंद ने कहा गुरु के आशीर्वाद के कारण ही कानपुर के एक छोटे से गांव का बच्चा राष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचा। सीखने कला लोगों में पूरी उम्र तक रहनी चाहिए। हमारे समाज में गुरु को हमेशा मार्गदर्शक माना जाता है। चरित्र, संस्कर, सत्य की खोज के लिए गुरु हमेशा प्रेरित करते रहते हैं। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए उन्होंने प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए अपने गुरु का चरण स्पर्श किया। कोविंद ने कहा कि कुशल बनाने में शिक्षकों की जरुरत है। दुनियां में हो रहे तकनीकी बदलाव के कारण शिक्षकों को भी अपडेट रहना चाहिए। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैकल्टी रिसर्च की भूमिका इसलिए अहम हो जाती है। उद्योग जगत और विश्वविद्यालय अपने तरीके से काम कर रहे हैं। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैकल्टी रिसर्च की पहल बेहद ही सुंदर है। कई देश अपनी शिक्षण संस्थान को मजबूत कर रहा है।
भारतीय विद्या भवन के वायस प्रेसिडेंट बनवारी लाल पुरोहित ने भारतीय संस्कृति की चर्चा करते हुए कहा यह वेदों के जमाने से है जबकि दुनियां के कई देशों की संस्कृति में समय समय पर बदलाव होता रहा है। सांस्कृतिक पूंजी और धरोहर का मेल हो जाए तो भारत बहुत आगे बढ़ेगा। भारती विद्या भवन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैकल्टी रिसर्च के साथ मिलकर नया इतिहास बनाने जा रहा है। चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को नीति और राजशात्र सिखाया था।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैकल्टी रिसर्च के वायस चेयरमैन प्रो. राजेंद्र श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा मानव टैलेंट भारत की संपत्ति है जिसमें निवेश की जरुरत है। अभीतक भारत में पश्चिमी देशों की तकनीक आ रही है लेकिन यह भारत के लिए उपयुक्त नहीं है। भारत में 11 फीसदी बुजुर्ग रहते हैं। भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में बुजुर्गों की जरुरत कैसे पूरी हो पाएगी। भारत में सैद्धांतिक पढ़ाई होती है इससे धरातल मजबूत नहीं हो सकता। अमेरिका और चीन के बाद भारत का बाजार है । इसे देखते हुए कोर्स को डिजाइन किया जा रहा है।














