जनजीवन ब्यूरो / नई दिल्ली। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रूप से मजबूत करने के लिए “जननी” प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह लॉन्च हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय नवाचार एवं समावेशिता शिखर सम्मेलन में किया गया।
जननी एक सेवा-केन्द्रित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे प्रजनन आयु की महिलाओं के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की व्यापक निगरानी और रखरखाव के लिए डिज़ाइन किया गया है। विद्यमान आरसीएच पोर्टल के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित यह प्लेटफॉर्म, देखभाल की निरंतरता में प्रमुख सेवा वितरण कार्यकलापों को दर्ज करके एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड बनाता है।
इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की सुचारू निगरानी सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसव की तैयारी, प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, नवजात शिशु देखभाल, घर आधारित नवजात शिशु एवं शिशु देखभाल और परिवार नियोजन शामिल हैं। निरंतर निगरानी और समय पर उपाय को सक्षम बनाकर, जननी सेवा वितरण को मजबूत करता है और हर चरण में देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
जननी की एक प्रमुख विशेषता क्यूआर-कोड वाले डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) कार्डों की शुरुआत है, जो स्वास्थ्य अभिलेखों तक आसान पहुंच और सुवाह्यता को सक्षम बनाते हैं। इस प्लेटफॉर्म में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के लिए स्वचालित अलर्ट, पर्यवेक्षी समीक्षा के लिए वास्तविक समय के डैशबोर्ड और नियत-सूची निर्माण जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं, जो समय पर ट्रैकिंग, निगरानी और लक्षित उपायों को सक्षम बनाती हैं।
यदि किसी महिला की गर्भावस्था जोखिमपूर्ण है, तो सिस्टम स्वतः अलर्ट देगा। इससे समय रहते इलाज और रेफरल संभव होगा। मातृ मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य अधिकारियों को तुरंत डेटा मिलेगा। किस क्षेत्र में कितनी गर्भवती महिलाएं हैं, कितने टीकाकरण हुए, कौन जोखिम में है — यह सब रियल टाइम में देखा जा सकेगा।
स्व-पंजीकरण सुविधा
महिलाएं:
- मोबाइल नंबर,
- आधार,
- आभा (ABHA ID),
- या बायोमेट्रिक माध्यम से खुद पंजीकरण कर सकती हैं।
यह सुविधा वेब और मोबाइल दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
प्रवासी आबादी को बड़ा फायदा
जननी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है:
- “ऑल इंडिया सर्च” सुविधा।
- इससे यदि कोई महिला दूसरे राज्य में चली जाए, तब भी उसका स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
- रिकॉर्ड दोबारा बनाने की जरूरत नहीं होगी।
यह खासकर प्रवासी मजदूर परिवारों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
दूसरे सरकारी प्लेटफॉर्म से जुड़ाव
जननी को अन्य राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों से भी जोड़ा गया है, जैसे:
- यू-विन
- पोषण अभियान
इससे:
- टीकाकरण,
- पोषण,
- और मातृ स्वास्थ्य डेटा एक साथ काम कर सकेगा।
नागरिकों को क्या लाभ होंगे?
जननी प्लेटफॉर्म नागरिकों को:
- टीकाकरण रिमाइंडर,
- जांच की तारीख,
- अस्पताल की जानकारी,
- संभावित प्रसव स्थल,
- पोषण संबंधी सलाह,
- स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री
उपलब्ध कराएगा।
इससे महिलाओं को समय पर इलाज और बेहतर स्वास्थ्य निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
अब तक की उपलब्धियां
सरकार के अनुसार:
- 1.34 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का पंजीकरण हो चुका है।
- 30 लाख से अधिक गर्भवती महिलाएं दर्ज की गई हैं।
- 30 लाख से अधिक डिजिटल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं।
- 1 लाख से अधिक बायोमेट्रिक सत्यापन किए गए हैं।
इस पहल का महत्व
यह प्लेटफॉर्म भारत की डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि:
- इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने में मदद मिलेगी।
- स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही बढ़ेगी।
- ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक निगरानी आसान होगी।
- महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल सशक्तिकरण मिलेगा।
सरकार का उद्देश्य है कि देश की हर गर्भवती महिला और नवजात शिशु को समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें।













