डॉ.नीलम लेखी को लगभग 112 साल पुरानी संस्था दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) के अध्यक्ष पद को सुशोभित करने का सौभाग्य मिला है। लगभग सात दशक बाद यह सौभाग्य किसी महिला को मिला है। 63 साल पहले वर्ष 1963 में पहली बार डॉ सुशीला गिल डीएमए की अध्यक्ष बनीं 17000 सदस्यों वाले इस संस्था में लगभग 40 फीसदी महिला डॉक्टरों की भागीदारी है। DMA देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित चिकित्सा संगठनों में से एक है। डॉ. नीलम लेखी देश के एक प्रसिद्ध रेडियोलॉजिस्ट हैं। डीएमए अध्यक्ष बनने से पहले, वह राज्य स्तरीय उपाध्यक्ष के रूप में काम कर चुकी हैं और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की पूर्वी दिल्ली शाखा की पहली महिला अध्यक्ष भी रह चुकीं हैं। डॉक्टरों की समस्याओं समेत उनकी रणनीति को लेकर डॉ.नीलम लेखी से अमलेंदु भूषण खां ने सीधा सवाल किया। प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश :-
प्रश्न- एक महिला होने के नाते डीएमए प्रेसिडेंट के तौर पर आप किन किन चुनौतियों का सामना कर रही हैं?
उत्तर- सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों को एकजुट रखना मान रही हूं। निजी रुप में प्रैक्टीश कर रहे डॉक्टरो, नर्सिंग होम में काम करने वाले डॉक्टर जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं वो गंभीर समस्या है। वर्षों पहले बने नर्सिग होम आज फायर सेफ्टी की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। जिस समय ये नर्सिंग होम बने उस समय फायर फायटिंग नॉर्म्स नहीं थे। लेकिन जिस तरह से नर्सिंग होम में आग लग रही है वह काफी चिंताजनक है। निजी अस्पतालों में, नर्सिंग होम के डॉक्टों पर जिस तरह से हमले हो रहे हैं वह बेहद ही गंभीर बात है । बायो वेस्ट की समस्या भी गंभीर समस्या है। जबतक डॉक्टर मिलकर नहीं लड़ेंगे तबतक हल नहीं हो सकता।
प्रश्न- सुप्रीम कोर्ट ने रियायती दर पर जमीन लेने वाले अस्पतालों पर गरीब मरीजों को इलाज नहीं मुहैया कराने पर सख्त ऐतराज जताया है और ऐसे अस्पतालों पर सरकार से कारर्वाई करने का आदेश दिया है। इसे आप किस तरीके से देखती हैं?
उत्तरः रियायती दरों पर जमीन लेने वाले अस्पतालों – नर्सिंग होम को 20 फीसदी बेड गरीब मरीजों को मुहैया कराने और उपचार करने का नियम है। डीएमए और दिल्ली सरकार द्वारा इस समस्या को हल करने की पहल की जा रही है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और सुविधाओं की कमी के कारण गरीब मरीज निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं। सरकार को चाहिए कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाए । आबादी जिस रफ्तार से बढ़ी सरकारी अस्पतालों की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ी। निजी अस्पतालों पर जिस तरह से कामर्शियल टैक्स लगाए गए हैं उसमें रियायतें सरकार को देनी चाहिए।
प्रश्न- क्या आप मानती हैं कि सरकार ने नए अस्पताल नहीं बनाए ?
उत्तर- यह सच है कि सरकारी अस्पतालों की संख्या जनसंख्या के हिसाब से नहीं बढ़ी। देश में डॉक्टरों की भारी कमी है। आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं लेकिन वो भी बेहद कम हैं। जिसके कारण छोटी बीमारी के लिए भी लोगों को इलाज के लिए टर्शियरी केंद्रों पर भेज दिए जाते हैं।
प्रश्न- क्या सरकारी अस्पतालों में टर्शियरी केयर की सुवीधा पर्याप्त हैं?
उत्तर- सरकारी अस्पतालों में टर्शियरी केयर की सुविधा बेहद ही कम है। डॉक्टर, स्टॉफ, नर्स सबों की भारी कमी है। बिस्तरों की संख्या बेहद कम है। सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की बेहद जरूरत है। सरकार छोटे नर्सिंग होम को बढ़ावा दे तो समस्याओं को कम किया जा सकता है। सरकार कॉर्मशियल टैक्स में कटौती करे ताकि निजी अस्पताल लोगों को बेहतर इलाज मुहैया करा सके।
प्रश्न-दिल्ली के अस्पतालों पर बाहरी मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसे आप किस तरह से देखती हैं?
उत्तर- यह बात सच है कि दिल्ली समेत बड़े शहरों के अस्पतालों पर बाहरी मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है। यहां के अस्पतालों में बेहतर सुविधा उपलब्ध है। दूरदराज के मरीजों को पता है कि वहां बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध है। लोग जमीन पर सोकर भी इलाज करवाते हैं। सरकार को चाहिए कि दूरदराज के अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाए । जब स्थानीय अस्पतालों में इलाज मिलेगा तो डॉक्टर भी मरीजों को यहां नहीं भेजेंगे।
प्रश्न- देश में डॉक्टर-नर्स और स्टाफ की उपलब्धता को आप किस रुप में देखती हैं?
उत्तर- सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी है। सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों पर 300-400 मरीजों का भारी बोझ है। रेजीडेंट्स डॉक्टरों को 36 घंटे तक काम करना पड़ता है। इससे डॉक्टरों की कैपिसिएटी और कैपेबिलिटी दोनों पर असर पड़ता है। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर इस तरह का दबाव नहीं है। मरीज बेहतर सुविधा चाहते हैं।
प्रश्न- आयुष्मान कार्ड को आप किस रुप में देखती हैं?
उत्तर- यह योजना बहुत ही अच्छी है। गरीब मरीज इलाज नहीं करवा पाते थे, लेकिन अब वो बेधड़क इलाज करवाते हैं। सरकारी अस्पतालों के बदले निजी अस्पतालों में इलाज करवाना गरीब मरीज भी ज्यादा चाहते हैं। लेकिन इसमें थोड़े से बदलाव की जरूरत है। भ्रष्टाचार को रोकना बेहद जरुरी है। दलाल के झांसे में मरीज आ जाते हैं और फंस जाते हैं।
प्रश्न- स्वास्थ्य क्षेत्र पर सरकारी प्रयास को आप किस रुप में देखती हैं?
उत्तर- सरकार स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र के लिए ज्यादा बजट आवंटित करे। एमबीबीएस और पीजी डिग्रीधारी डॉक्टरों को नौकरी नहीं मिल पा रही है। देश में डॉक्टरों की भारी कमी है। सरकार ने डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापित करने की नीति तो बनाई, लेकिन डॉक्टरों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। जिसके कारण डॉक्टर जाने से कतराते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अल्ट्रासाउंड, लैब टेस्ट तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सरकारी नौकरी ना मिलने और सुविधाओं की कमी के कारण डॉक्टर निजी अस्पतालों में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं।















