जसविंदर सिद्धू
जिस समय फुटबाल प्रेमियों को छोड़ कर ज्यादातर भारतीय 16 जुलाई की मध्य रात्री में गहरी नींद में होंगे, पूरी दुनिया फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड और अर्जेटीना के बीच होने वाले कड़क सेमीफाइनल को देखने के लिए अपनी पलके बिछाए बैठेंगे. दोनों ही टीमें काफी प्रतिस्पर्धी फुटबॉल खेलकर सेमीफाइनल में पहुंची हैं. इसलिए कौन जीतेगा, इस पर दावा करना सही नहीं होगा. लेकिन एक बात तय है कि इंग्लैंड को इस सेमीफाइनल में दो ताकतों के खिलाफ खेलना है और वह होंगे अर्जेटीना की टीम और दस नंबर की जर्सी पहने उसके स्टार 39 साल के लियोनल मैसी. इंग्लैंड के पास भी दस नंबर की जर्सी पहनने वाले युवा जूड वेलिंघम हैं जिस पर काबू पाना आसान नहीं है. जाहिर है कि भारतीय समय के अनुसार 20 तारीख को होने वाले फाइनल का टिकट हासिल करने का दारोमदार दस नंबर की जर्सी पर टिका है.
इंग्लैंड की टीम के अब तक के खेल का आंकलन करें तो साफ है कि उसने सेमीफाइनल के इस सफर तक लगभग सारे उतार चढ़ाव देख लिए हैं. ऐसे में अगर वह मैसी के दिमाग का पढ़ने के बाद उसके पैरों पर अंकुश लगाने में सफल होती है तो फाइनल उसकी पहुंच के बाहर नहीं होगा.
इसमें कोई शंका नहीं है कि मैसी ने अपनी टीम को इस मुकाम पर लाने के लिए अपनी जीवन का सारा अनुभव झोंक दिया है. लेकिन एक सच यह भी है कि उनकी गति और सोच में धीमापन दिख रहा है. इसके अलावा उन्होंने आस्ट्रिया और मिस्र के खिलाफ पेनाल्टी किक मिस की है.
तय है कि अगर इंग्लैंड कि डिफेंस मैसी पर लगाम लगाने में कामयाब होती है तो उसका मैच जीतने के चांस ज्यादा है.
दूसरी तरफ अर्जेंटीना की डिफेंस की सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन होने वाले हैं. यकीनी तौर पर यह मैदान पर दिमाग को शातिर ढंग से इस्तेमाल करने वाला खिलाड़ी उम्रदराज लगता है लेकिन किसी भी टीम के डिफेंस उन्हें किसी भी तरह की आजादी देने की स्थिति में नहीं है. केन के खिलाफ एक गलती और स्कोर बोर्ड इंग्लैंड के साथ होगा.
ऐसे में जब अर्जेंटीना की डिफेंस केन का नियंत्रित करने की रणनीति पर अमल कर रही होगी, उनकी टीम का युवा छापामार फॉरवर्ड जूड वेलिंनघंम एक तारपीडों की तरह किसी भी समय नुकसान करने को तैयार रहेंगे. यह खिलाड़ी ऐसा है जिसके पैरों की रेंज में गेंद आने के बाद गोल सामने होने पर गलती की गुंजाईश कम होती है.यह भी याद रखना होगा कि नॉर्वे के खिलाफ दो गोल की बदौलत ही यह टीम फाइनल में खेलने की उम्मीद लगाए हैं. मैदान पर दिमाग को कंप्यूटर की तरह चलाने वाला यह खिलाड़ी इस विश्व कप में छह गोल कर चुका है.













