जनजीवन ब्यूरो / रायपुर : छत्तीसगढ़ से रोजगार की तलाश में दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना बेहतर भविष्य का सपना लेकर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे, लेकिन आतंकवादियों ने उनको मौत के घाट उतार दिया। उनकी मौत से दोनों परिवार गहरे सदमे में हैं। दोनों युवकों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी और वे दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में स्थित उस ईंट-भट्ठे पर शुक्रवार देर शाम आतंकवादियों की गोलीबारी में मारे गए, जहां वे काम करते थे। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम जिले में एक दिन पहले हुए आतंकवादी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
मालखरौदा पुलिस थाना इलाके के बुंदेली गांव के रहने वाले दीपक रात्रे (24) के चाचा हलधर रात्रे ने बताया कि वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उन्होंने बताया कि दीपक की शादी कुछ साल पहले हुई थी और उसके परिवार में उसकी पत्नी और चार महीने का बेटा है।
रात्रे ने बताया कि वह बेहतर भविष्य की उम्मीद में सात-आठ महीने पहले अपनी पत्नी के साथ जम्मू-कश्मीर गया था ताकि ईंट भट्ठे पर काम कर सके। दीपक के पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी। उसका छोटा भाई दिव्यांग है, उसकी मां और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। हलधर का कहना है कि ‘‘परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से बात की है, जो दीपक के शव को उनके पैतृक गांव वापस लाने की कोशिश कर रहा है।
इसी आतंकी घटना में मारे गए भूपेंद्र भैना सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुइया गांव से थे। भैना (28) तीन-चार महीने पहले अपनी पत्नी के साथ जम्मू-कश्मीर में ईंट-भट्टे पर काम करने गया था। वह अपने अपने चार साल के बेटे को अपनी दादी और नाबालिग बहन की देखरेख में छोड़ गया था।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने बताया कि उनके माता-पिता और छोटा भाई हिमाचल प्रदेश में ईंट-भट्टे पर मजदूरी करते हैं।अधिकारी ने बताया कि पुलिस शनिवार तड़के करीब दो बजे भूपेंद्र के गांव पहुंची और परिवार को घटना की जानकारी दी।
शर्मा ने कहा कि हालात की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने रात में उनकी बुज़ुर्ग दादी और छोटी बहन को उनकी मौत की खबर नहीं देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मौजूद उनके पिता को सूचित कर दिया गया है, जबकि स्थानीय अधिकारी कुलगाम में पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर हर जरूरी मदद पहुंचाने के लिए समन्वय कर रहे हैं।
अपने भाई की मौत से अनजान, भूपेंद्र की छोटी बहन ने संवाददाताओं को बताया कि वह कुछ महीने पहले ही काम की तलाश में कश्मीर गए थे क्योंकि परिवार के लिए गुजारा करना मुश्किल हो रहा था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कुलगाम में “कायरतापूर्ण आतंकी हमले” में छत्तीसगढ़ के मजदूरों की हत्या को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छत्तीसगढ़ सरकार पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें हर संभव मदद देगी।
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम जिले में एक दिन पहले हुए आतंकवादी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। यह राशि जिला प्रशासन द्वारा घोषित छह-छह लाख रुपये की तत्काल सहायता के अतिरिक्त होगी।













