जनजीवन ब्यूरो / नई दिल्ली । E20 पेट्रोल को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का बचाव किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि अगर पेट्रोल में इथेनॉल का मिश्रण नहीं किया गया होता तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के दौरान दिल्ली में पेट्रोल का भाव करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता था।
मंत्रालय ने कहा कि E20 कार्यक्रम के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल मिलाया जाता है, जिसे पूर्व निर्धारित कीमतों पर खरीदा जाता है। इसके कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं पर कम पड़ा। सरकार के अनुसार, उस दौरान दिल्ली में उपभोक्ताओं ने करीब 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल खरीदा और संकट के चरम समय में करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक की बचत हुई।
खाद्य सुरक्षा से समझौते के आरोपों को नकारा
केंद्र ने उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि इथेनॉल उत्पादन के लिए गरीबों के हिस्से का अनाज इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), कल्याणकारी योजनाओं और अनिवार्य भंडारण की जरूरतें पूरी करने के बाद ही अधिशेष अनाज को इथेनॉल उत्पादन के लिए मंजूरी दी जाती है।
सरकार ने कहा कि इथेनॉल कार्यक्रम में मुख्य रूप से क्षतिग्रस्त अनाज, टूटे हुए चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न का भी उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि कृषि उत्पादों का बेहतर इस्तेमाल करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
FCI चावल को लेकर सरकार की सफाई
मंत्रालय ने कहा कि इथेनॉल उत्पादन केवल FCI चावल पर निर्भर नहीं है। इसके लिए मक्का, गन्ने का रस, शीरा, क्षतिग्रस्त अनाज समेत कई कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 में विभिन्न फीडस्टॉक के लिए तय कीमतों में मक्का से उत्पादित इथेनॉल की कीमत 71.86 रुपये प्रति लीटर, गन्ने के रस/शीरे से 65.61 रुपये प्रति लीटर और FCI चावल से 60.32 रुपये प्रति लीटर रही।
मंत्रालय ने बताया कि 2023-24 में इथेनॉल उत्पादन में FCI चावल की हिस्सेदारी केवल 0.02 प्रतिशत थी, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 24.64 प्रतिशत हुई। सरकार के अनुसार, यह वृद्धि खाद्य सुरक्षा की जरूरतें पूरी करने के बाद उपलब्ध अधिशेष स्टॉक के कारण हुई।
E20 को बताया ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति
केंद्र ने कहा कि E20 कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सस्ता पेट्रोल उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है।
मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक:
1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
316 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चे तेल के आयात का विकल्प तैयार हुआ है।
950 लाख मीट्रिक टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है।
किसानों और डिस्टिलर को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
सरकार ने कहा कि भारत अभी भी अपनी तेल जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है और इथेनॉल ब्लेंडिंग वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है।
गडकरी ने माना था माइलेज में कमी संभव
E20 पेट्रोल को लेकर बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में बताया था कि E20 पेट्रोल से कुछ वाहनों में माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि इससे इंजन को नुकसान नहीं पहुंचता और E20 अनुकूल वाहनों में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं है।













