जनजीवन ब्यूरो / नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड से 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर किसी भी तरह का शुल्क न लगाने का निर्देश जारी किया है. 14 सितंबर को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, 2000 रुपये तक के डिजिटल भुगतान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई फीस नहीं ली जाएगी. हालांकि, इस कदम ने 2,000 से अधिक के मर्चेंट लेन-देन पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लगाने का रास्ता साफ कर दिया है, जिस पर अब राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है.कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा निशाना साधा है. राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार ने चुपचाप यूपीआई लेन-देन पर फीस वसूलने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है.
बड़े लेन-देन का गणित समझाया
राहुल गांधी ने नीतिगत बदलावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी सरकार ने दो हजार रुपये से ज्यादा के मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति दे दी है. उन्होंने इसके पीछे का गणित समझाते हुए दावा किया कि भले ही दो हजार रुपये से ज्यादा के लेन-देन की संख्या कुल यूपीआई में सिर्फ पांच प्रतिशत हो, लेकिन पूरे यूपीआई ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं बड़े लेन-देन से आता है.
आम ग्राहक की जेब ढीली होने का दावा
सरकार के उस दावे पर भी राहुल गांधी ने कड़े सवाल खड़े किए हैं, जिसमें कहा गया था कि इस फैसले से ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाएगी. राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार भले ही कहे कि ग्राहक से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा, लेकिन जब दुकानदार पर यह फीस थोपी जाएगी तो वह पैसा आखिर कहां से आएगा? उन्होंने दावा किया कि दुकानदार इस खर्च को अपनी जेब से नहीं भरेंगे, बल्कि वे चीजों और सेवाओं की कीमतों को बढ़ाकर इसे अंततः आम ग्राहक की जेब से ही वसूलेंगे.
अमेरिकी कंपनियों के सामने सरेंडर का आरोप
इस विवाद में राहुल गांधी ने विदेशी ताकतों का एंगल जोड़ते हुए सरकार को घेरा है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की ‘जीरो-एमडीआर’ (Zero-MDR) नीति का कड़ा विरोध करती आ रही थीं. अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है. उन्होंने कहा कि यूएस ट्रेड डील की तरह ही, समझौते में फंसी मोदी सरकार एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने पूरी तरह सरेंडर कर रही है.
क्या है सरकार का नया नोटिफिकेशन?
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (धारा-10A) में संशोधन के बाद यह अधिसूचना जारी की गई है. संसद के मानसून सत्र (13 अगस्त, 2026) में यह संशोधन विधेयक पारित हुआ था. अब भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की समिति MDR की दरों का निर्धारण करेगी.
सुरक्षा और अपग्रेड: सरकार का कहना है कि ट्रांजैक्शन की संख्या में भारी उछाल को देखते हुए प्रणाली को साइबर सुरक्षा, फ्रॉड रोकने और लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है.
सब्सिडी पर निर्भरता खत्म: डिजिटल भुगतान प्रणाली को लंबे समय तक सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर चलाना व्यावहारिक नहीं है. प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और बाज़ार को मजबूत बनाने के लिए एक आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल जरूरी है.
आपको बता दें कि भारत सरकार ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए के तहत यूपीआई भुगतान को लेकर एक नया राजपत्र (Notification) जारी किया है. इसके तहत सरकार ने बैंकों को दो हजार रुपये तक के छोटे यूपीआई लेन-देन और रुपे डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतानों पर किसी भी प्रकार की फीस लगाने से साफ रोक दिया है. हालांकि, दो हजार रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर आगे चलकर शुल्क (MDR) लगाया जा सकता है. यह चार्ज कितना होगा और किन कारोबारियों पर लागू होगा, यह अभी पूरी तरह तय नहीं किया गया है.













